प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 132वें संस्करण के दौरान शिक्षा में अनुभवात्मक अधिगम और निरंतर अभ्यास के महत्व पर जोर दिया।
राष्ट्र को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने ज्ञान प्राप्त करने में निरंतर प्रयास के महत्व को रेखांकित करने के लिए एक पारंपरिक कहावत का हवाला दिया, और कहा कि सक्रिय भागीदारी सीखने के परिणामों को काफी हद तक बढ़ाती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने बेंगलुरु की एक अनूठी पहल पर प्रकाश डाला, जहां प्रयोग शिक्षा अनुसंधान संस्थान स्कूली छात्रों के बीच विज्ञान शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि संस्थान अनुसंधान-उन्मुख शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करता है और उसने "अन्वेषण" नामक एक पहल शुरू की है।
यह कार्यक्रम कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों को रसायन विज्ञान, भूविज्ञान और स्वास्थ्य जैसे विभिन्न विषयों में नवाचार करने के अवसर प्रदान करता है। प्रधानमंत्री के अनुसार, यह कार्यक्रम छात्रों को मूल्यवान शोध अनुभव प्रदान करता है और उन्हें अपने शोध-प्रबंध प्रकाशित करने में भी सक्षम बनाता है।
परीक्षा पे चर्चा के दौरान हुई बातचीत का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कई छात्र विज्ञान विषय से डरते हैं। उन्होंने कहा कि अन्वेषण जैसी पहल व्यावहारिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करके इस चुनौती का समाधान करने में मदद करती हैं, जिससे जिज्ञासा और रुचि बढ़ती है।
प्रयोग टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस तरह की पहल युवाओं में वैज्ञानिक सोच विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि व्यावहारिक शिक्षण अनुभव छात्रों को विज्ञान के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं और कहा कि कुछ प्रतिभागी भविष्य में अग्रणी वैज्ञानिक बन सकते हैं।








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