बिलासपुर 10 अप्रैल। सड़क हादसों के पीड़ितों और उनके परिजनों के लिए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का फैसला बड़ी राहत लेकर आया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि केवल समय सीमा (लिमिटेशन) के आधार पर बीमा कंपनियां क्षतिपूर्ति देने से इनकार नहीं कर सकतीं। तकनीकी कारणों का हवाला देकर पीड़ितों को न्याय से वंचित नहीं किया जा सकता।
बीमा कंपनियों की याचिकाएं खारिज
मामले में श्रीराम जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, चोलामंडलम एमएस जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी, बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, मैग्मा एचडीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड और इफको टोक्यो जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड सहित कई कंपनियों ने 40 से अधिक सिविल रिवीजन याचिकाएं दायर की थीं।
इन याचिकाओं में तर्क दिया गया था कि मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 166(3) के तहत तय समय सीमा बीत जाने के बाद ट्रिब्यूनल को क्लेम सुनने का अधिकार नहीं है।





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