डॉक्टरों की नई रिसर्च के मुताबिक, एक हैरान करने वाली स्टडी सामने आई है। न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के डॉ.
सैम पारनिया और उनकी टीम ने पाया कि हार्ट रुकने के बाद भी इंसान का ब्रेन लगभग एक
घंटे तक काम कर सकता है। पहले, डॉक्टरों
का मानना था कि ऑक्सीजन की कमी के कारण हार्ट रुकने के 10 मिनट के अंदर ब्रेन पूरी तरह से फेल हो सकता
है। रिसर्च से पता चला कि कुछ मरीज़ों का ब्रेन इलाज के एक घंटे बाद भी एक्टिव
रहा।
रिसर्च कैसे की गई?
यह स्टडी US
और UK के 25 हॉस्पिटल में की गई, जिसमें हार्ट अटैक से बचे 53 लोगों को देखा गया। इसका मतलब है कि मौत के
तुरंत बाद के पलों में भी,
ब्रेन पूरी तरह से बंद नहीं होता; यह अभी भी चीज़ों को महसूस और समझ सकता है।
मरीज़ों ने क्या अनुभव किया? स्टडी
में शामिल लगभग 10 में से 4 मरीज़ों ने बताया कि हार्ट रुकने के बाद भी
उन्हें कुछ चीज़ें याद रहती हैं या वे उनके बारे में सोच सकते हैं। कुछ को तो यह
भी याद था कि उनके इलाज के दौरान डॉक्टर और नर्स एक-दूसरे से क्या बातें कर रहे
थे। उन्हें कमरे में हो रही हर बात भी याद थी, भले
ही वे क्लिनिकली डेड थे।
जांच से क्या पता चला?
जब डॉक्टरों ने मशीनों की जांच की, तो उन्होंने पाया कि दिल रुकने के 35 से 60 मिनट बाद भी दिमाग में सोचने-समझने की
लहरें अचानक बढ़ गईं। डॉक्टरों का कहना है कि यह कोई सपना या वहम नहीं था, बल्कि एक असली अनुभव था जो लगभग सभी मरीज़ों
में एक जैसा था।
इस
रिसर्च से क्या फ़ायदा होगा?
रिसर्च से पता चला कि इंसान का दिमाग हमारी सोच
से कहीं ज़्यादा मज़बूत होता है और मुश्किल समय में भी आसानी से हार नहीं मानता।
यह जानकारी डॉक्टरों को हार्ट अटैक के बाद CPR और
ब्रेन डैमेज के इलाज को बेहतर बनाने में मदद करेगी। इस रिसर्च ने इस बारे में एक
नई चर्चा शुरू कर दी है कि मौत के समय इंसान की चेतना असल में कब और कैसे खत्म
होती है।







