भारत में उर्वरक प्रबंधन तेजी से डिजिटल और डेटा आधारित व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) द्वारा उर्वरक विभाग के लिए विकसित और तकनीकी रूप से समर्थित इंटीग्रेटेड फर्टिलाइज़र मैनेजमेंट सिस्टम (iFMS) अब केवल उर्वरक बिक्री और सब्सिडी से जुड़े लेन-देन का रिकॉर्ड रखने वाली प्रणाली नहीं रह गया है, बल्कि उत्पादन से लेकर अंतिम उपभोक्ता तक पूरी आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी करने वाले व्यापक डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में उभर रहा है। यह प्लेटफॉर्म उत्पादन, आयात, डिस्पैच, परिवहन, स्टॉक उपलब्धता, खुदरा बिक्री और सब्सिडी प्रोसेसिंग समेत उर्वरक इकोसिस्टम के विभिन्न चरणों को एक साथ जोड़ता है। राष्ट्रीय स्तर पर काम करने वाला iFMS 14 करोड़ से अधिक आधार-लिंक्ड उर्वरक खरीदारों, 2.5 लाख से अधिक खुदरा विक्रेताओं और सालाना करीब 7 करोड़ मीट्रिक टन उर्वरक बिक्री से जुड़े लेन-देन को कवर करता है। इसके साथ ही यह करीब 2 लाख करोड़ रुपए की वार्षिक उर्वरक सब्सिडी के प्रबंधन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
डेटा एनालिटिक्स से उर्वरक खपत पर पैनी नजर
उर्वरक विभाग ने हाल के वर्षों में iFMS की भूमिका को और व्यापक बनाया है। नए डैशबोर्ड और एनालिटिकल टूल्स के जरिए उत्पादन, आयात, डिस्पैच, परिवहन, स्टॉक और खुदरा बिक्री की एकीकृत निगरानी संभव हो रही है। राष्ट्रीय से लेकर राज्य, जिला और खुदरा विक्रेता स्तर तक उपलब्ध डेटा से असामान्य खपत पैटर्न और आपूर्ति से जुड़ी संभावित चुनौतियों की शुरुआती पहचान की जा सकती है। विभिन्न श्रेणियों के खरीदारों, भूमि स्वामित्व, फसलों, जिलों और उर्वरक के प्रकार के आधार पर खरीद और खपत के पैटर्न का विश्लेषण भी किया जा रहा है। इससे नीति निर्माताओं को केवल बिक्री के आंकड़ों तक सीमित रहने के बजाय उर्वरक की वास्तविक जरूरत और उपयोग के रुझानों को समझने में मदद मिल रही है।
किसान, भूमि और फसल डेटा से जुड़ रहा iFMS
डेटा आधारित उर्वरक प्रबंधन की दिशा में iFMS का किसान, भूमि और फसल संबंधी डेटाबेस के साथ एकीकरण महत्वपूर्ण कदम है। हरियाणा में ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ (MFMB) के साथ एकीकरण और इसके बाद एग्रीस्टैक के साथ जुड़ाव की दिशा में किए गए प्रयासों ने उर्वरक लेन-देन को कृषि संबंधी जानकारी से जोड़ने का आधार तैयार किया है। इससे उर्वरक खरीदारों का किसान और भूमि रिकॉर्ड से मिलान करने तथा उर्वरक की खरीद को कृषि आवश्यकताओं से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण अनुभव प्राप्त हुआ है।
QR आधारित उर्वरक बुकिंग की नई व्यवस्था
उर्वरक बिक्री के लिए फ्रेमवर्क (FFS) डिजिटल बदलाव की एक महत्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य मोबाइल ऐप आधारित उर्वरक बुकिंग प्रणाली को मौजूदा iFMS पॉइंट ऑफ सेल (PoS) नेटवर्क से जोड़ना है। इस व्यवस्था के तहत किसान एग्रीस्टैक में तैयार अपनी डिजिटल पहचान के आधार पर आवश्यक उर्वरक की बुकिंग कर सकता है। भूमि और स्वामित्व संबंधी विवरणों के सत्यापन के बाद QR आधारित बुकिंग तैयार होती है और इसकी जानकारी PoS डिवाइस पर उपलब्ध कराई जाती है। इससे किसान की जरूरत, बुकिंग और वास्तविक खरीद के बीच बेहतर सत्यापन संभव होता है। फ्रेमवर्क के जरिए प्रति हेक्टेयर उर्वरक खपत, भूमि के आकार के अनुसार खपत, फसल और उत्पाद के अनुसार उपयोग तथा अनुमानित आवश्यकता और वास्तविक खरीद के बीच संबंध जैसे पहलुओं का भी विश्लेषण किया जा सकता है।
उर्वरक की आवाजाही पर डिजिटल निगरानी
उर्वरक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम (VLTS) के माध्यम से उर्वरक खेपों की आवाजाही की डिजिटल निगरानी को भी मजबूत किया जा रहा है। डिस्पैच संबंधी जानकारी को वाहन की लोकेशन से जोड़कर परिवहन के दौरान उर्वरक खेपों की निगरानी की जा सकती है, जिससे देरी या असामान्य आवाजाही के पैटर्न की पहचान में मदद मिलती है। iFMS में उपलब्ध गुड्स-इन-ट्रांजिट, डिस्पैच और स्टॉक डेटा के साथ वाहन ट्रैकिंग के एकीकरण से विभाग को डिस्पैच प्वाइंट से अंतिम गंतव्य तक उर्वरक की आवाजाही का व्यापक डिजिटल दृष्टिकोण मिल रहा है।
इलेक्ट्रॉनिक सब्सिडी प्रोसेसिंग से बढ़ी पारदर्शिता
iFMS उर्वरक सब्सिडी प्रबंधन में भी अहम भूमिका निभा रहा है। सब्सिडी भुगतान को PoS नेटवर्क के जरिए दर्ज वास्तविक उर्वरक बिक्री से जोड़ा गया है। 1 जनवरी 2026 से सब्सिडी बिलों के इलेक्ट्रॉनिक प्रसंस्करण और PFMS तथा e-Bill प्रक्रियाओं समेत वित्तीय प्रणालियों के साथ एकीकरण को और मजबूत किया गया है। डिजिटल वर्कफ्लो से मैनुअल हस्तक्षेप कम करने, दावों की ट्रेसेबिलिटी बढ़ाने और सब्सिडी दावों तथा भुगतानों के विभिन्न चरणों की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी में मदद मिल रही है। DBT से जुड़े बिलों और लेन-देन की जांच को मजबूत करने के लिए रैंडम वेरिफिकेशन और अतिरिक्त डेटा एनालिटिक्स का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
उर्वरक प्रबंधन का नया डिजिटल भविष्य
iFMS का विस्तार भारत में उर्वरक प्रबंधन के बदलते स्वरूप को दर्शाता है। उत्पादन और आयात से लेकर लॉजिस्टिक्स, स्टॉक, किसान एवं भूमि डेटा, उर्वरक बुकिंग, खुदरा बिक्री और सब्सिडी प्रोसेसिंग तक विभिन्न प्रणालियों का एकीकरण अधिक पारदर्शी और प्रभावी व्यवस्था तैयार कर रहा है। अब डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल केवल उर्वरक बिक्री का रिकॉर्ड रखने के लिए नहीं, बल्कि यह समझने के लिए भी किया जा रहा है कि उर्वरक कहां उपलब्ध है, उसकी आपूर्ति किस तरह हो रही है, कौन इसे खरीद रहा है और कृषि आवश्यकताओं के अनुरूप इसका कितना उपयोग हो रहा है। 14 करोड़ से अधिक खरीदारों और देशव्यापी उर्वरक आपूर्ति नेटवर्क को जोड़ने वाला iFMS भारत के कृषि क्षेत्र में डिजिटल गवर्नेंस का महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर उभर रहा है। डेटा आधारित निगरानी, बेहतर आपूर्ति प्रबंधन और पारदर्शी सब्सिडी प्रणाली के जरिए यह प्लेटफॉर्म देश के महत्वपूर्ण कृषि इनपुट के अधिक प्रभावी और वैज्ञानिक प्रबंधन की नई राह तैयार कर रहा है।








